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भाषा - परिभाषा, भाषा के प्रकार और विकास - What Is Language In Hindi

What Is Language In Hindi  - Bhasha Kya Hai Hindi Bhasha Ka Vikash by Acchisiksha

What Is Language In Hindi  - Bhasha Kya Hai Hindi Bhasha Ka Vikash by Acchisiksha


भाषा क्या है : भाषा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने विचार और भाव को व्यक्त कर पाते है एक दूसरे से आदान-प्रदान कर सकते है |


भाषा शब्द संस्कृत से बना है जिसका मतलब बोलना होता है बचपन से ही हम अलग अलग प्रकार से भाषा का प्रयोग करते आ रहे है | जबसे बोलना सीखा है तब से ही हम भाषा को अपने ढंग से समझना और उसका अपने दैनिक जीवन में उपयोग करना समझ लेते है |

केवल इंसान ही नही संसार में सभी प्राणी और जीव अपने बीच विचारों और भावनाओ के आदान प्रदान के लिए भाषा का ही प्रयोग करते है |

भाषा ही एक ऐसा माध्यम है जो लोगो के सामने समाज के सामने हमारे व्यक्तित्व को परिभाषित करती है अगर आप अपनी भाषा में शब्दों का चुनाव सही और वाणी मे मिठास के साथ करते है तो यही भाषा आपको समाज मे सम्मान दिलाती है और अगर आप इसी भाषा को कटु और गलत शब्दों का प्रयोग करते है तो समाज में अपमानित होते है |

भाषा कोई एक नहीं होती है भाषा हर समय बदलती रहती है भाषा परिवर्तनशील है हर रोज़ कुछ नया जुड़ता है तो कुछ मिट जाता है विश्व में आज लगभग 2796 भाषाएँ है यह भाषा एक ही दिन में नही बनी है इंका विकास धीरे-धीरे हुआ है |

हर इंसान भाषा को अपने तरीके से उपयोग में लाता है सब लोग अपने-अपने तरीके से इसको बोलते है और अपने विचार लोगो के सामने रखते है |

भाषा के प्रकार – किसी भी भाषा के मुख्य 3 रूप होते है
(1) मौखिक भाषा
(2)
लिखित भाषा
(3)
सांकेतिक भाषा

(1) मौखिक भाषा : - भाषा के इस रूप मे व्यक्ति अपने विचार बोल कर व्यक्त करता है लोग इसको सुन लार समझते है और हमरे विचार उन तक इस माध्यम से जाते है |

(2) लिखित भाषा : - भाषा के इस रूप में हम अपने विचार लोगो को लिख कर व्यक्त करते है जैसे अगर आप काही अपने परिवार से अलग रहते है तो एक खत के माध्यम से अपनी बाटो को लिख कर आप फाइवर तक भेज सकते है भाषा का यह रूप लिखित भाषा कहलता है |

(3) सांकेतिक भाषा : - अगर कोई व्यक्ति बोल नही सकता तब इस भाषा के माध्यम से संकेत या इशारा करके अपने विचार लोगो को समझता है |

जब कोई बात संकेतो या इशारों के माध्यम से समझाई जाती है तो उस भाषा को सांकेतिक भाषा कहा जाता है |

गूंगे या मूक व्यक्ति इस भाषा का उपयोग करते है और अपनी बात दूसरे के सामने इशारों के माध्यम से रखता है और समझता है |

मातृभाषा
अगर किसी  का जन्म बंगालीभाषी परिवार में हुआ है, इसलिए वह बंगाली बोलता है। किसी का जन्म हिंदीभाषी परिवार में हुआ है, इसलिए वह हिंदी बोलती है। बंगाली और हिंदी उनकी मातृभाषाएँ हैं।
जिस भाषा को आप अपने परिवार और आस-पास समाज और अन्य लोगो से सीखते है वह आपकी मातृभाषा होगी |

प्रादेशिक भाषा
प्रादेशिक भाषा- जब कोई एक प्रदेश किसी भाषा को अपने सम्पूर्ण प्रदेश में सामान्य रूप से बोलने के लिए उपयोग करते है तो उसे 'प्रादेशिक भाषा' कहते हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय भाषा (International Language) :- अन्तर्राष्ट्रीय भाषा- किसी भाषा को विश्व के दो या दो से अधिक राष्ट्रों में बोली जाती है तो वह अन्तर्राष्ट्रीय भाषा बन जाती है। जैसे- अंग्रेजी (English) अन्तर्राष्ट्रीय भाषा है।

राजभाषा :- राजभाषा- वह भाषा जो देश के कार्यालयों व राज-काज में प्रयोग की जाती है, राजभाषा कहलाती है।
जैसे- भारत की राजभाषा अंग्रेजी तथा हिंदी दोनों हैं। अमरीका की राजभाषा अंग्रेजी है।

अगर आप हिन्दी का अध्ययन कर रहे है तो आपको हिन्दी व्याकरण का ज्ञान होना जरूरी है तभी आप हिन्दी को ठीक प्रकार से समझ सकते है | हिन्दी भाषा को शुद्ध रूप से लिखने, पढ़ने और बोलने के लिए हिन्दी पूर्ण रूप से हिन्दी व्याकरण समझना अति आवश्यक है |
व्याकरण के द्वारा ही किसी भाषा को शुद्ध रूप से लिखा जा सकता है व्याकरण किसी भाषा की आत्मा है व्याकरण भाषा के नियम है अगर आप हिन्दी भाषा का अध्ययन कर रहे है तो व्याकरण का ज्ञान किए बिना हिन्दी का पूर्ण ज्ञान प्राप्त नही कर सकते |

व्याकरण : - अगर आप हिन्दी का अध्ययन कर रहे है तो आपको हिन्दी व्याकरण का ज्ञान होना जरूरी है तभी आप हिन्दी को ठीक प्रकार से समझ सकते है | हिन्दी भाषा को शुद्ध रूप से लिखने, पढ़ने और बोलने के लिए हिन्दी पूर्ण रूप से हिन्दी व्याकरण समझना अति आवश्यक है |
व्याकरण के द्वारा ही किसी भाषा को शुद्ध रूप से लिखा जा सकता है व्याकरण किसी भाषा की आत्मा है व्याकरण भाषा के नियम है अगर आप हिन्दी भाषा का अध्ययन कर रहे है तो व्याकरण का ज्ञान किए बिना हिन्दी का पूर्ण ज्ञान प्राप्त नही कर सकते |
हिन्दी व्याकरण हिंदी के सभी स्वरूपों का चार खंडों के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है :-
जैसे कि
(1) वर्ण विचार के अंतर्गत ध्वनि और  वर्ण
(2) शब्द विचार के अंतर्गत शब्द के विविध पक्षों संबंधी नियमों
(3)वाक्य विचार के अंतर्गत वाक्य संबंधी विभिन्न स्थितियों
(4)छंद विचार में साहित्यिक रचनाओं के शिल्पगत पक्षों पर विचार किया गया है।

 वर्ण विचार :- वर्ण विचार के अंतर्गत ध्वनि और  वर्ण का अध्ययन किया जाता है यहाँ वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई होती है जिसके और अधिक टुकड़े नही किए जा सकते, हिन्दी भाषा में मुखी रूप से 52 वर्ण शामिल है जिनके आधार पर ही सम्पूर्ण हिन्दी का अध्ययन किया जाता है |
52 वर्ण मिल कर हिन्दी वर्णमाला का निर्माण करते है इस वर्णमाला में वर्णो को दो भागों विभाजित किया है जिनको वर्णो के भेद कहा जाता है |
1.   स्वर
2.   व्यंजन

     स्वर (vowel)

· जिनका उच्चारण स्वतंत्र होता है, वे वर्ण स्वर कहलाते हैं।
· उच्चारण करते समय हम सिर्फ होठ एवं तालू का उपयोग किया जाता हैं।
· हिन्दी वर्णमाला में 11 स्वर होते हैं। अ, ,, , , , , , , ,

     व्यंजन (consonant)

·   जिनका स्वतंत्र उच्चारण नहीं होता एवं उन्हें बोलने के लिए स्वरों की सहायता लेनी पड़ती है। व्यंजन कहलते है
·   व्यंजनों में स्वर नहीं जुड़ते तब तक इनके नीचे हलन्त लगा होता है। जैसे: क्, च्, छ्, ज्, झ् आदि।
·   हिन्दी वर्णमाला में स्वर को छोड़ कर कुल 33 व्यंजन हैं। जैसे: , , , , प आदि।



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