Bachpan ki Yaadein in Hindi - बचपन की यादें
Bachpan ki Yaadein in Hindi


45+ बचपन की यादें शायरी | Best Bachpan Shayari in Hindi | Bachpan Ki Shayari

बचपन की यादें हर किसी को ख़ुशी देतीं है आपको यहाँ Bachpan Shayari in Hindi का सबसे ख़ास शायरी संग्रह पढ़ने को मिलेगा | उम्मीद है आपको Bachpan Ki Shayari ज़रूर पसंद आयेंगी.

बचपन हर इंसान की ज़िन्दगी का सबसे सुनहरा समय होता है बचपन वो बचपन की खिलौने, स्कूल का बैग, क्लास की मस्ती सब बचपन की कभी ना भूल पाने वाली कीमती यादें होती है बचपन में सोचते है की हम बड़े क्यों नहीं हो रहे मगर हमें जब पता नहीं होता की ये नादान बचपन ही ज़िन्दगी का सबसे हसीन समय है |

बचपन हम सबका यादगार समय जब हम नादान होते ना किसी से मतलब होता है ना ही दोस्ती से मतलब था और ना ही मतलब की दोस्ती थी खेलने की मस्ती थी अब ना जाने कहाँ खो गयी वो बचपन की हसी ख़ुशी हम फिर से तो उस बचपन को पा नही सकते मगर जो बचपन की यादें है उनको याद करके ख़ुश जरुर हो सकते है |

बचपन से जुडी यादों पर लिखी हुई कुछ खास शायरियों का एक बेहतरीन संग्रह आपको यहाँ पढने मिलेगा जिस से आपके बचपन की यादें ताज़ा हो जायेंगी और आप भी अपने बचपन के हसीन पलों को इन बचपन शायरी (Bachpan Shayari in Hindi) के माध्यम से वापस याद कर पाएंगे |

 

 

Bachpan Ki Yaadein in Hindi
Bachpan Ki Yaadein in Hindi 

झूठ बोलते थे फिर भी कितने सच्चे थे हम

ये उन दिनों की बात है जब बच्चे थे हम


बचपन के दिन भी कितने अच्छे होते थे

तब दिल नहीं सिर्फ खिलौने टूटा करते थे

अब तो एक आंसू भी बर्दाश्त नहीं होता

और बचपन में जी भरकर रोया करते थे

Bachpan Ki Shayari
Bachpan Ki Shayari

बचपन में पैसा जरुर कम था 

मगर यकीन मानो उस बचपन में दम था 


 

मुझे फिर से थमा दे माँ

वह मेरे स्कूल का बैग

अब मुझे और नहीं सहा जाता

इस जिन्दगी का भारी बोझ

 

मोहल्ले में अब रहता है

पानी भी हरदम उदास

सुना है पानी में नाव चलाने

वाले बच्चे अब बड़े हो गए


 

तब तो यही हमे भाते थे,

आज भी याद हैं छुटपन की हर कविता,

अब हजारों गाने हैं पर याद नहीं,

इनमे शब्द हैं पर मीठा संगीत कहाँ.

 

दौड़ने दो खुले मैदान में

नन्हे क़दमों को जनाब

ज़िन्दगी बहुत भगाती है

बचपन गुज़र जाने के बाद

 

बचपन के दिन भी वो क्या खूब थे

ना दोस्ती से मतलब था

और ना मतलब की दोस्ती थी

अजीब सौदागर है ये वक़्त भी

जवानी का लालच देकर  बचपन ले गया.

 

जिंदगी फिर कभी मुस्कुराई बचपन की तरह

मैंने मिट्टी भी जमा की खिलोने भी लेकर देखे.

 

अब तो खुशियाँ हैं इतनी बड़ी,

चाँद पर जाकर भी ख़ुशी नहीं,

एक मुराद हुई पूरी कि दूसरी गयी,

कैसे हो खुश हम, कोई बता दो,

अब तो बस दुःख भी हैं इतने बड़े,

कि हर बात पर दिल टुटा करता है.

 

 

तभी तो याद है हमे  हर वक़्त बस बचपन का अंदाज,

आज भी याद आता है बचपन का वो खिलखिलाना,

दोस्तों से लड़ना, रूठना, मनाना...

 

बचपन के खिलौने सा कहीं छुपा तुम्हें

आंसू बहाऊँ, पैर पटकूँ और पा लू तुम्हें

Bachpan Ki Yaadein - बचपन की यादें
Bachpan Ki Yaadein - बचपन की यादें 

 

वो बचपन की अमीरी ना जाने कहाँ खो गयी

जब पानी में हमारे भी जहाज चला करते थे


Hindi Bachpan Ki Purani yaden - बचपन की यादें
Hindi Bachpan Ki Purani Yaden

 

बचपन में हम सोचते थे हम बड़े क्यों नहीं हो रहे

और अब सोचते है हम बड़े क्यों हो गए


Bachpan Ki Purani Yaden - बचपन की पुरानी यादें
Bachpan Ki Purani Yaden

 

बचपन में भरी दुपहरी नाप आते थे पूरा गांव,

जब से डिग्रियाँ समझ में आई, पाँव जलने लगे.

 


बचपन में हम जहां चाहे हस लेते थे, जहाँ चाहे रो लेते थे

और अब हसने के लिए तमीज़ चाहिए और रोने के लिए तन्हाई

 

बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी

अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है

खुदा अब जो मेरी कहानी लिखना

बचपन में ही मर जाऊ ऐसी जिंदगानी लिखना.

 

तभी तो याद है हमें

हर वक़्त बस बचपन का अंदाज

आज भी याद आता है

बचपन का वो खिलखिलाना

दोस्तों से लड़ना, रूठना, मनाना

 

कुछ अपनी हरकतों से,

तो कुछ अपनी मासूमियत से,

उनको सताया था मैंने,

कुछ वृद्धों और कुछ वयस्कों को,

इस तरह उनके बचपन से मिलाया था मैंने

 

ईमान बेचकर बेईमानी खरीद ली

बचपन बेचकर जवानी खरीद ली

वक़्त, खुशी, सुकून

सोचता हूँ ये कैसी जिन्दगानी खरीद ली!



 

नन्हीं-नन्हीं यादों सा था बचपन

जाने कब बड़ा हो गया

 

बचपन समझदार हो गया,

मैं ढूंढता हू खुद को गलियों मे।।

 

बचपन में लगी चोट पर मां की हल्की-हल्की फूँक

और कहना कि बस अभी ठीक हो जाएगा!

वाकई अब तक कोई मरहम वैसा नहीं बना!

 

Bachpan Ki Purani yaden  in Hindi
Bachpan Ki Purani yaden in Hindi 


किसने कहा नहीं आती वो बचपन वाली बारिश

तुम भूल गए हो शायद अब नाव बनानी कागज़ की.

 

कितने खुबसूरत हुआ करते थे बचपन के वो दिन

सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी.

 

वास्तविकता को जानकर,

मेरा भी सपनों से समझौता हुआ,

लोग यही समझते रहे,

लो एक और बच्चा बड़ा हुआ।

 

सब कुछ तो हैं, फ़िर क्यों रहूँ उदास..

तेरे जैसा मैं भी बन पाता मनमौजी;

लथपथ धूल-मिट्टी से, लेता खुलकर साँस।

 

गाँव में है

फटेहाल नौनिहाल

भूखा किसान

फिर भी हुक्म के तामील में

लिख रहे मेरा भारत महान

 

कितने खुबसूरत हुआ करते थे बचपन के वो दिन ..!!

सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी ..!!

 

लगता है माँ बाप ने बचपन में खिलौने नहीं दिए,

तभी तो पगली हमारे दिल से खेल गयी !!

 

रोने की वजह भी थी हंसने का बहाना था

 क्यो हो गए हम इतने बडे इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था.....

 

 

 

ना कुछ पाने की आशा ना कुछ खोने का डर

बस अपनी ही धुन, बस अपने सपनो का घर

काश मिल जाए फिर मुझे वो बचपन का पहर

 

वो क्या दिन थे

मम्मी की गोद और पापा के कंधे,

पैसे की सोच और लाइफ के फंडे,

कल की चिंता और फ्यूचर के सपने,

अब कल की फिकर और अधूरे सपने,

मुड़ कर देखा तो बहुत दूर हैं अपने,

मंजिलों को ढूंडते हम कहाँ खो गए,

जाने क्यूँ हम इतने बड़े हो गए|

 

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो

भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी

 

मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन

वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

 

 

 

कैसे भूलू बचपन की यादों को मैं,

कहाँ उठा कर रखूं किसको दिखलाऊँ?

संजो रखी है कब से कहीं बिखर ना जाए,

अतीत की गठरी कहीं ठिठर ना जाये.!

 

चाँद के माथे पर बचपन की चोट के दाग नजर आते हैं

रोड़े,पत्थर और गुल्लोंसे दिनभर खेला करता था

बहुत कहा आवारा उल्काओं की संगत ठीक नहीं!

 

कैमरे जरा कम थे मेरे गांव में,

जब बचपन देखना होता है,

तो मां की आंखों में झांक लेता हूं।

 

बचपन में जब

धागों के बीच डिब्बे फसाकर

फोन-फोन खेलते थे

नहीं तो मालूम नहीं था

एक दिन इस फोन में

जिंदगी सिमटती चली जायेगी

 

यादें बचपन कि भूलती नहीं

सच्चाई से हमको मिलाती नहीं

जीना चाहते है हम बचपन फिर से

पर शरारतें बचपन कि अब हमे आती नहीं !

 

बहुत ही संगीन जुर्म को,

हम अंजाम देकर आए हैं!

बढ़ती उम्र के साए से,

कल बचपन चुरा लाए हैं!

 

काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था,

खेलने की मस्ती थी ये दिल अवारा था।

कहाँ गए इस समझदारी के दलदल में,

वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था।

 

बचपन के दिन भी कितने अच्छे होते थे

तब दिल नहीं सिर्फ खिलौने टूटा करते थे

अब तो एक आंसू भी बर्दाश्त नहीं होता

और बचपन में जी भरकर रोया करते थे

 

बचपन में कितने रईस थे हम

ख्वाहिशें थी छोटी-छोटी

बस हंसना और हंसाना

कितना बेपरवाह था वो बचपन

 

याद आता है वो बीता बचपन

जब खुशियाँ छोटी होती थी

बाग़ में तितली को पकड़ खुश होना

तारे तोड़ने जितनी ख़ुशी देता था

 

वो भी क्या दिन थे....????

जब बच्चपन में कोई रिश्तेदार जाते समय 10 Rs. दे जाता था..

और माँ 8Rs. टीडीएस काटकर 2 Rs. थमा देती थी....!!!